भिलाई टाउनशिप के व्यापारिओ की समस्त याचिका ख़ारिज-बढ़ा हुआ लीज़ रेंट पटाना पड़ेगा

भिलाई टाउनशिप के व्यापारिओ की समस्त याचिका ख़ारिज-बढ़ा हुआ लीज़ रेंट पटाना पड़ेगा

माननीय उच्च न्यायलय बिलासपुर ने भिलाई टाउनशिप के 32 व्यापारिओ द्वारा भिलाई इस्पात सयंत्र के विरुद्ध दायर WPC-2337/2025 सहित 32 अन्य रिट याचिकाएं खारिज कर दीं। निर्णय में कहा गया -लीज़ धारकों का नवीनीकरण का स्वचालित अधिकार नहीं है।नवीनीकरण की शर्तें SAIL के विवेकाधिकार में हैं
कलेक्टर के निर्देश बाध्यकारी नहीं: केंद्र सरकार के उपक्रम के नाते SAIL पर स्थानीय कलेक्टर के निर्देश लागू नहीं होते
।ज्यूरिस्डिक्शन का विषय: सारी eviction/unlawful occupancy संबंधी कार्यवाही Estate Officer के अधिकार क्षेत्र में आती है,सीधे कोर्ट में रिट नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने SAIL के पक्ष में निर्णय दिया और उसके नए “लैंड प्रीमियम”, ग्राउंड रेंट व अन्य चार्जेज़ को लागू माना।
यह माननीय न्यायालय का आदेश (सीएवी आदेश) है जिसे माननीय न्यायमूर्ति श्री अरविंद कुमार वर्मा ने लिखा है, जिसमें भिलाई स्टील प्लांट टाउनशिप में प्लॉट के दीर्घकालिक किरायेदारों (लीज़ धारकों) द्वारा स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के खिलाफ दी गई कई रिट याचिकाओं का निपटारा किया गया है।मामले का सारांश -याचिकाकर्ताओं ने SAIL द्वारा 1 अप्रैल 2025 को भेजे गए प्रस्ताव/मांग पत्र के खिलाफ याचिका दायर की, जिसमें किरायेदारों से लीज़ नवीनीकरण के समय नए “लैंड प्रीमियम” (भूमि मूल्य का 25%), बढ़ा हुआ ग्राउंड रेंट (भूमि मूल्य का 1% प्रति वर्ष), सेवा शुल्क (भूमि मूल्य का 2% प्रति वर्ष) व सुरक्षा जमा जैसी भारी राशि मांगी गई थी।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये नए चार्जेज़ एकतरफा, मनमाने व गैरकानूनी हैं तथा मूल लीज़ अनुबंध के विरुद्ध हैं, जिसमें नवीनीकरण के समय केवल ग्राउंड रेंट अधिकतम 50% तक बढ़ाने की अनुमति थी, और कोई नया प्रीमियम या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाना था।याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें अनुबंध अधिकारों का उल्लंघन: मूल लीज़ में नवीनीकरण के समय अतिरिक्त प्रीमियम या सेवा शुल्क लेने का कोई प्रावधान नहीं।राज्य नीति की अनदेखी: जिला कलेक्टर, दुर्ग (31 जुलाई 2019) के पत्र में स्पष्ट किया गया था कि नवीनीकरण के समय कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं लिया जा सकता।एकतरफा कार्यवाही: SAIL ने बिना पूर्व सूचना/परामर्श के 2008 में नए प्रीमियम की नीति लागू कर दी।संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: अनुबंध की शर्तों को मनमाने ढंग से बदलना अनुचित और न्यायसंगतता के विरुद्ध है (अनुच्छेद 14 का उल्लंघन)।

न्यायिक दृष्टांतों का हवाला: झारखंड हाईकोर्ट द्वारा SAIL की इसी तरह की नीतियां रद्द की जा चुकी हैं।SAIL और प्रतिवादीयों की दलीलेंनवीनीकरण का स्वचालित अधिकार नहीं: पूर्व लीज़ समाप्ति के बाद किरायेदार “अनधिकृत कब्जेदार” बन जाते हैं। नए अनुबंध पर ही नवीनीकरण संभव है।नई शर्तों पर नवीनीकरण अधिकार: लीज़ क्लाज़ के अनुसार नवीनीकरण की सभी शर्तें SAIL निर्धारित कर सकता है।SAIL बोर्ड का अधिकार: जुलाई 2008 की बोर्ड बैठक में प्रस्तावित नई नीति सभी किरायेदारों पर समान रूप से लागू है। कलेक्टर के निर्देश बाध्यकारी नहीं: केंद्र सरकार के उपक्रम के नाते SAIL पर स्थानीय कलेक्टर के निर्देश लागू नहीं होते।ज्यूरिस्डिक्शन का विषय: सारी eviction/unlawful occupancy संबंधी कार्यवाही Estate Officer के अधिकार क्षेत्र में आती है, सीधे कोर्ट में रिट नहीं किया जा सकता।न्यायालय का निर्णयदोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, माननीय उच्च न्यायालय ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। निर्णय में कहा गया -लीज़ धारकों का नवीनीकरण का स्वचालित अधिकार नहीं है।नवीनीकरण की शर्तें SAIL के विवेकाधिकार में हैं।याचिकाकर्ताओं ने समय से नवीनीकरण हेतु आवेदन नहीं किया।2008 की SAIL नीति कानूनी है और सभी पर लागू।* न्यायालय प्रशासनिक व्यावसायिक नीतियों में सामान्यतः हस्तक्षेप नहीं करता जब तक मनमानी या दुर्भावना सिद्ध न हो ।नतीजतन, न्यायालय ने SAIL के पक्ष में निर्णय दिया और उसके नए “लैंड प्रीमियम”, ग्राउंड रेंट व अन्य चार्जेज़ को लागू माना