भिलाई में अस्पतालों को ब्लैकमेल कर करोड़ों की उगाही का खेल! गुरमीत बाधवा पर एक और बड़ा केस
भिलाई में अस्पताल प्रबंधन को धमकाकर मोटी रकम वसूलने की कोशिश करने वाले आरोपी गुरमीत सिंह बाधवा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले से एक ब्लैकमेलिंग प्रकरण में गिरफ्तार गुरमीत बाधवा के खिलाफ अब सुपेला थाना में एक और गंभीर अपराध दर्ज किया गया है। इस बार स्पर्श अस्पताल के महाप्रबंधक अखिल मडाने की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(4) तथा छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवक एवं चिकित्सा सेवा संस्थान अधिनियम 2010 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि सुंदर नगर निवासी गुरमीत बाधवा अस्पतालों में पहुंचकर खुद को बड़े राजनीतिक, प्रशासनिक और मीडिया रसूख वाला व्यक्ति बताता था। वह अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाकर व्यवस्थाओं में कथित खामियां निकालता, जांच कराने, अस्पताल बंद करवाने और प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी देता था। आरोप है कि उसने स्पर्श अस्पताल प्रबंधन से 20 लाख रुपये की अवैध मांग की और रकम नहीं मिलने पर फर्जी शिकायतें, आरटीआई आवेदन तथा मीडिया में बदनाम करने की धमकी देकर लगातार मानसिक दबाव बनाया।
शिकायत के अनुसार आरोपी जनवरी 2026 से ही अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों को निशाना बना रहा था। कई बार अस्पताल पहुंचकर स्टाफ से अभद्र व्यवहार किया गया, फोन कॉल्स के जरिए दबाव बनाया गया और फर्जी मामलों में फंसाने की धमकियां दी गईं। आरोपी बड़े अधिकारियों और नेताओं से संबंध होने का हवाला देकर भय का माहौल तैयार करता था ताकि अस्पताल प्रबंधन उसकी मांगों के आगे झुक जाए।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि गुरमीत बाधवा ने खुद को मीडिया से जुड़ा बताकर अस्पताल की प्रतिष्ठा धूमिल करने की भी कोशिश की। उसने कुछ न्यूज चैनलों में बयानबाजी कर प्रबंधन पर दबाव बढ़ाया और आरटीआई सहित अन्य शिकायत प्रक्रियाओं का कथित रूप से दुरुपयोग कर उगाही का सुनियोजित नेटवर्क खड़ा करने की योजना बनाई।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया कि आरोपी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ अपनी तस्वीर दिखाकर खुद को अधिकृत जांच अधिकारी जैसा प्रस्तुत किया। उसने अस्पताल की बिल्डिंग, पर्यावरण मानकों, ऑक्सीजन प्लांट और अन्य व्यवस्थाओं में अनियमितता बताकर अस्पताल सील कराने तक की धमकी दी। जब 20 लाख रुपये की मांग पूरी नहीं हुई तो आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए अस्पताल में ताला लगवाने, फर्जी केस दर्ज कराने और प्रशासनिक दबाव बनाने की चेतावनी दी।
दुर्ग पुलिस पहले ही आरोपी को एक अन्य ब्लैकमेलिंग मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब लगातार सामने आ रहे नए मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि आरोपी सुनियोजित तरीके से चिकित्सा संस्थानों को निशाना बनाकर भय, दबाव और फर्जी प्रभाव के जरिए अवैध वसूली का नेटवर्क संचालित कर रहा था।
फिलहाल पुलिस आरोपी के पूरे नेटवर्क, उसके संपर्कों और अन्य संभावित पीड़ित संस्थानों की जांच में जुटी हुई है। यह कार्रवाई चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ब्लैकमेलिंग जैसे संगठित अपराधों पर सख्त प्रहार के रूप में देखी जा रही है। भिलाई में इस मामले ने निजी अस्पतालों की सुरक्षा, प्रशासनिक दुरुपयोग और संगठित उगाही के खतरनाक पहलुओं को उजागर कर दिया है।










