भिलाई निगम में सत्ता संग्राम तेज: भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा का महापौर-आयुक्त गठजोड़ पर बड़ा हमला, भ्रष्टाचार, अवैध संचालन और लोकतंत्र की हत्या के गंभीर आरोप
भिलाई। नगर निगम भिलाई की राजनीति में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पार्षद श्री पीयूष मिश्रा ने महापौर श्री नीरज पाल और निगम आयुक्त श्री राजीव पाण्डेय की कार्यप्रणाली पर गंभीर, तीखे और सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने निगम प्रशासन पर साठगांठ, नियमों की अनदेखी, अवैध संचालन और जनहित की खुली उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताया।
श्री मिश्रा ने कहा कि 25 मार्च 2026 को भाजपा पार्षदों द्वारा निगम आयुक्त राजीव पाण्डेय को पद से हटाने का प्रस्ताव निगम अधिनियम की धारा 54(2) के तहत सामान्य सभा में प्रस्तुत किया गया था, जिसे सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से पारित किया। उनके अनुसार प्रस्ताव पारित होते ही आयुक्त को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त माना जाना चाहिए था, और उसके बाद किसी भी प्रशासनिक, वित्तीय अथवा नीतिगत निर्णय पर हस्ताक्षर या नोटशीट संचालन पूरी तरह अवैध है। बावजूद इसके आयुक्त द्वारा निगम के कार्यों का संचालन जारी रखना गंभीर नियम उल्लंघन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर नीरज पाल और आयुक्त राजीव पाण्डेय के बीच आपसी साठगांठ के चलते निगम प्रशासन में पारदर्शिता समाप्त हो चुकी है और जनहित के स्थान पर निजी एवं राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। भाजपा पार्षद दल ने इसे निगम व्यवस्था को कमजोर करने वाली खतरनाक प्रवृत्ति बताया।
श्री मिश्रा ने जानकारी दी कि सामान्य सभा से पूर्व नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा की उपस्थिति में भाजपा पार्षद दल की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें सभी पार्षदों ने महापौर और आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सामान्य सभा में जनविरोधी, नियम विरुद्ध और संदिग्ध प्रस्तावों का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
सामान्य सभा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयुक्त द्वारा संतोषजनक जवाब न दिए जाने और सदन को गुमराह करने के प्रयासों के बाद भाजपा पार्षदों ने आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। भाजपा का आरोप है कि प्रस्ताव के बाद आयुक्त ने पार्षदों के साथ दुर्व्यवहार किया और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया, जिससे जनप्रतिनिधियों का अपमान हुआ।
पीयूष मिश्रा ने कहा कि भाजपा पार्षद दल जल्द ही राज्य शासन को औपचारिक शिकायत भेजकर मांग करेगा कि 25 मार्च 2026 के बाद आयुक्त द्वारा किए गए सभी वित्तीय भुगतान, प्रशासनिक निर्णय और निगम संचालन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि कोई निर्णय नियम विरुद्ध पाया जाता है तो संबंधित राशि की रिकवरी आयुक्त से की जाए तथा उनके सभी निर्णय तत्काल निरस्त कर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि सामान्य सभा में पारित संकल्प की प्रति अब तक राज्य शासन को विधिवत नहीं भेजी गई, जो प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और सत्ता संरक्षण की ओर संकेत करता है। भाजपा का कहना है कि यह पूरा मामला निगम प्रशासन में लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या और जवाबदेही समाप्त करने का उदाहरण बन चुका है।
अंत में श्री मिश्रा ने स्पष्ट किया कि भाजपा पार्षद दल नगर निगम भिलाई में भ्रष्टाचार, अनियमितता, सत्ता के दुरुपयोग और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निरंतर संघर्ष करेगा तथा जनता के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। भिलाई निगम की यह लड़ाई अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि पारदर्शिता बनाम सत्ता संरक्षण की बड़ी राजनीतिक जंग बनती नजर आ रही है।










