छत्तीसगढ़

भारतीय कृषि महाविद्यालय में मशरूम उत्पादन एवं प्रोसेसिंग पर प्रशिक्षण

दुर्ग। भारतीय कृषि महाविद्यालय, दुर्ग के बी.एससी. (कृषि) चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थी मॉड्यूल कार्यक्रम के अंतर्गत मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकी सीख रहे हैं।प्राचार्य डॉ. ए.के. दुबे, सलाहकार डॉ. मुकेश कुमार प्रजापति, डॉ अनुश्री श्यामकुवर, श्री. नवनीत कुमार महंत, श्री. झानेन्द्र पटेल,श्रीमती. भारती यादव और कु. रिया राजपूत के मार्गदर्शन में |

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स्पर्स

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने ऑयस्टर मशरूम का सफल उत्पादन किया तथा उत्पादन, प्रबंधन और विपणन की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। मशरूम के द्वितीयक उत्पाद जैसे पापड़, कुकीज, अचार, पाउडर और पैनकेक  कम निवेश में मोटी कमाई का अवसर देते हैं। महाविद्यालय के फाइनल वर्ष के छात्रों ने मशरूम से पापड़, कुकीज, अचार, पाउडर, पैनकेक बनाने की तकनीक सीख सफल परीक्षण भी किया  | 

मुकेश
Sarada

 मशरूम खेती एक कम निवेश, उच्च लाभ वाला कारोबार है जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयुक्त है , यह खेती कृषि-स्वतंत्र अवधि में भी आय का स्रोत बनती है तथा ग्रामीण युवाओं के लिए स्व-रोजगार का विकल्प है । मशरूम उच्च प्रोटीन और विटामिन युक्त, कम कैलोरी, उच्च फाइबर और कोलेस्ट्रॉल-रहित भोजन है जो हृदय और हाइपोटेंसिव मरीजों के लिए लाभकारी है तथा महिला सशक्तिकरण का माध्यम है क्योकि अधिकतर उत्पादन ईकाई महिला स्व सहायता समूहों द्वारा संचालित हैं|  

खाटू श्याम
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विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण उन्हें स्वरोजगार एवं कृषि उद्यमिता के लिए तैयार कर उनके कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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