3.88 करोड़ का भुगतान, लेकिन फाइल गायब! भिलाई जल परियोजना में किसे बचाने की कोशिश?
भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई की बहुचर्चित जल वितरण नेटवर्क परियोजना अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। परियोजना से जुड़े भुगतान विवरण सामने आने के बाद निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार ठेका एजेंसी Gimex India Projects & Engineering Pvt. Ltd. को अब तक कुल 3 करोड़ 88 लाख 16 हजार 650 रुपये का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरी परियोजना की मूल नस्ती (फाइल) अब तक अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।
प्राप्त भुगतान रिकॉर्ड के अनुसार 10 फरवरी 2025 को पाइपलाइन बिछाने के कार्य के लिए 47 लाख 24 हजार 211 रुपये का सिक्योर्ड एडवांस दिया गया था। इसके बाद 14 जुलाई 2025 को उच्च स्तरीय जलागार, राइजिंग मेन पाइपलाइन एवं वितरण पाइपलाइन कार्य के लिए 1 करोड़ 71 लाख 64 हजार 563 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं 2 जनवरी 2026 को इसी परियोजना के विस्तारीकरण और पाइपलाइन बिछाने के कार्य के लिए 1 करोड़ 69 लाख 27 हजार 876 रुपये और जारी किए गए। इस प्रकार कुल भुगतान राशि बढ़कर 3.88 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।
मामले को लेकर महापौर नीरज पाल ने निगम प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा चुका है तो परियोजना की मूल फाइल आखिर कहां है? भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया, कार्य की वास्तविक प्रगति क्या रही, गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट कहां है और भुगतान की प्रशासनिक प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई—इन सभी सवालों का जवाब देने के बजाय अधिकारी फाइल प्रस्तुत करने से बच रहे हैं।
महापौर ने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि इसमें वित्तीय अनियमितता और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को छिपाने की आशंका भी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना में मूल नस्ती सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है, जिसमें स्वीकृतियां, तकनीकी अनुमोदन, भुगतान आदेश और कार्य प्रगति से संबंधित समस्त जानकारी दर्ज रहती है। ऐसे में फाइल का गायब होना गंभीर संदेह को जन्म देता है।
महापौर नीरज पाल ने स्पष्ट कहा कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो अधिकारियों को जानकारी सार्वजनिक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। लेकिन फाइल का उपलब्ध नहीं होना और अधिकारियों की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर निगम में किसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है और जनता के करोड़ों रुपये का हिसाब कौन देगा?
मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर ने अपर आयुक्त को निर्देशित किया है कि संबंधित अधिकारियों, अभियंताओं और ठेका एजेंसी की भूमिका की जांच कर आवश्यक होने पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही उन्होंने कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट महापौर कार्यालय को सौंपने के निर्देश भी दिए हैं। महापौर ने चेतावनी दी है कि यदि जांच और कार्रवाई में किसी प्रकार की देरी हुई तो उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की मानी जाएगी।
महापौर के इस कड़े रुख के बाद निगम प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये के भुगतान वाली इस बहुचर्चित जल वितरण नेटवर्क परियोजना की मूल नस्ती आखिर कहां गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? आने वाले दिनों में यह मामला भिलाई की राजनीति और निगम प्रशासन में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि जनता अब यह जानना चाहती है कि जल परियोजना के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का वास्तविक हिसाब कब सामने आएगा।











