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छत्तीसगढ़

जग्गी हत्याकांड में बड़ा कानूनी मोड़: अमित जोगी को उम्रकैद के बाद सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई

रायपुर/दिल्ली। साल 2003 के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 25 मार्च 2026 और 2 अप्रैल 2026 के दोनों निर्णयों को एक साथ जोड़ते हुए 20 अप्रैल 2026 को संयुक्त सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

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अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों आदेशों को क्लब करते हुए संयुक्त सुनवाई तय की है। उन्होंने कहा कि आज की सुनवाई के दौरान उनके पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे ने प्रभावी रूप से पक्ष रखा। अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि उनके साथ हुआ गंभीर अन्याय अब सुधारा जाएगा और सत्य व न्याय की जीत होगी।

भारती
Sarada

हाईकोर्ट ने सुनाई है आजीवन कारावास की सजा

समशेर सिद्दीकी
खाटू श्याम
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गौरतलब है कि 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई की अपील (ACQA No. 66/2026) को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया था। हाईकोर्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान किया गया है।

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ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटा गया

अलताब
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हाईकोर्ट ने 31 मई 2007 को रायपुर की स्पेशल कोर्ट (एट्रोसिटी) द्वारा दिए गए फैसले को पूरी तरह पलट दिया। ट्रायल कोर्ट ने उस समय अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी सहित अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराया जाना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर देना कानूनी रूप से असंगत और त्रुटिपूर्ण है। अदालत ने इसे न्यायिक दृष्टि से गलत मानते हुए सीबीआई की अपील स्वीकार की और अमित जोगी को दोषी करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फिर खुला था मामला

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को दोबारा खोला गया था, जिसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई और नया फैसला सामने आया। अब सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल 2026 को होने वाली संयुक्त सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जहां इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।