भिलाई पब्लिक स्कूल
छत्तीसगढ़

“हमें कितनी भाषाएं आती हैं नहीं, हिंदी कितनी आती है यह मायने रखता है” — एसआरयू भिलाई की कार्यशाला में डॉ. सुधीर शर्मा

भिलाई।सेल रिफ्रेक्ट्री यूनिट (एसआरयू), भिलाई में शनिवार 30 मई 2026 को “वर्तमान समय में राजभाषा हिंदी की प्रासंगिकता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों, कर्मचारियों एवं श्रमिकों के बीच हिंदी भाषा के महत्व, उसके व्यावहारिक उपयोग तथा राजभाषा के रूप में उसकी भूमिका को लेकर जागरूकता बढ़ाना था।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता महाप्रबंधक (एसआरयू, भिलाई) श्री होमन कुमार साहू ने की। उन्होंने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर श्री मधुसूदन राव, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन/विद्युत/राजभाषा)ने स्वागत भाषण देते हुए एसआरयू भिलाई में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

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उन्होंने बताया कि मुख्य महाप्रबंधक श्री विशाल शुक्ल के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संयंत्र ने न केवल उत्पादन और प्रशासनिक क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल की हैं, बल्कि राजभाषा हिंदी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य करते हुए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) स्तर पर कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं।

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अपने संबोधन में श्री राव ने मुख्य अतिथि डॉ. सुधीर शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व का परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने दो विषयों में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है और पिछले लगभग 30 वर्षों से हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति सहित अनेक महत्वपूर्ण संस्थाओं में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। हिंदी के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से वे 30 से अधिक देशों की सांस्कृतिक यात्राएं भी कर चुके हैं तथा हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में कई पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं।

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अपने विस्तृत और प्रेरणादायक उद्बोधन में डॉ. सुधीर शर्मा ने कहा कि “हमें कितनी भाषाएं आती हैं, यह मायने नहीं रखता, बल्कि हमें हमारी राजभाषा कितनी आती है, यह अधिक महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि हिंदी को और अधिक सशक्त बनाना है तो इसकी शुरुआत सरकारी कार्यालयों, बैंकों और सार्वजनिक संस्थानों से होनी चाहिए।

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उन्होंने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील करते हुए कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए किसी बड़े अभियान की आवश्यकता नहीं है, बल्कि हमें अपने दैनिक कार्यों में हिंदी बोलने और लिखने की आदत विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि हिंदी दुनिया की सबसे सरल भाषाओं में से एक है, क्योंकि इसे जिस प्रकार बोला जाता है, लगभग उसी प्रकार लिखा भी जाता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री होमन कुमार साहू ने कहा कि डॉ. सुधीर शर्मा जैसे विद्वान और अनुभवी व्यक्तित्व से बहुत कम समय में भी अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां और प्रेरणाएं प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि कर्मचारियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में एसआरयू भिलाई प्रबंधन की ओर से श्री होमन कुमार साहू ने डॉ. सुधीर शर्मा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. शर्मा ने एसआरयू प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी भाषा को अधिक प्रभावी और अग्रणी बनाने के लिए समय-समय पर ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए। इससे कर्मचारियों में भाषा के प्रति रुचि बढ़ेगी और संस्थान की कार्य संस्कृति तथा उत्कृष्टता को भी नई दिशा मिलेगी।

कार्यशाला में एसआरयू भिलाई के अधिकारी, कर्मचारी तथा ठेका श्रमिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।