शासकीय स्कूलों और अस्पतालों का स्तर सुधारने यहां भी निगरानी समिति और जांच समिति का गठन हो: मुकेश चंद्राकर शासकीय स्कूलों में पढ़ाई और अस्पतालों में इलाज भगवान भरोसे
भिलाई नगर। भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने शिक्षा विभाग द्वारा विशेष निगरानी समिति एवं जांच समिति गठित करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि सरकार को इसी तरह की गंभीरता शासकीय स्कूलों और अस्पतालों पर भी दिखाना चाहिए। शासकीय स्कूलों की पढ़ाई का स्तर एवं शासकीय अस्पतालों में इलाज का स्तर कितना गिर चुका है यह किसी से छिपा नहीं है। सब कुछ भगवान भरोसे है।
अच्छा होता कि शासन, शासकीय स्कूलों और अस्पतालों की गुणवत्ता की जांच के लिए भी इसी तरह की निगरानी समिति और जांच समिति का गठन करती जिससे शिक्षा और इलाज का स्तर ऊपर उठता तथा आमजनों को राहत मिलती।
श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकारी स्कूलों में आज ना पर्याप्त शिक्षक हैं ना आवश्यक सुविधाएं। जो शिक्षक हैं उनकी भी ड्यूटी साल भर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लगा दी जाती हैं। वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर गली-गली भटकते रहता हैं। राज्य सरकार हो या केन्द्र सरकार, सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को उठाने कोई प्रयास नहीं किया जा रहे हैं इसके विपरीत प्रत्येक वर्ष शिक्षा के बजट में कटौती होती जा रही है। शिक्षा न तो राज्य सरकार की प्राथमिकता है और न केन्द्र सरकार की ।
श्री चंद्राकर का कहना है कि सरकारी शिक्षकों को साल भर गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझाए रखा जाता है। शिक्षकों को बाबू समझ कर सभी कार्य करवाए जा रहे हैं जैसे जनगणना, पशु गणना, पल्स पोलियों अभियान में बच्चों को दवा पिलाना, विधालय में पोषाहार के बारे में सभी जानकारी रखना , पोषाहार बनवाना, वितरण करवाना, पोषाहार की व्यवस्था के लिए दौड़ भाग करना आदि। ऐसे में शिक्षक, बच्चों को क्या पढ़ाएगा ?
श्री चंद्राकर का कहना था कि यही हाल शासकीय अस्पतालों का है। पर्याप्त संख्या में ना नर्स हैं ना डॉक्टर, और न ही मेडिकल सुविधाएं। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज इतना महंगा है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर ही रुख करता है। उन्होंने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार 80% सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। सरकार ने खुद यह रिपोर्ट तैयार की है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और जरूरी उपकरणों की भारी कमी है। यह रिपोर्ट 'नेशनल हेल्थ मिशन' के तहत आने वाले सरकारी अस्पतालों की हालत बताती है। श्री चंद्राकर ने कहा कि कभी-कभी सरकार की ओर से अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाता है लेकिन यह सिर्फ खानापूर्ति होती है।
श्री चंद्राकर का कहना था कि शासन प्राइवेट स्कूलों की तरह ही शासकीय स्कूलों और अस्पतालों का स्तर सुधारना चाहता है तो उसे यहां भी निगरानी समिति और जांच समिति का गठन करना चाहिए। इन समितियां की जवाबदेही होगी कि वह समय समय पर स्कूलों और अस्पतालों का भ्रमण कर वहां की ग्राउंड रिपोर्ट लेकर शासन को अपनी रिपोर्ट दें ताकि शासकीय स्कूलों में पढ़ाई और अस्पतालों में इलाज का स्तर बढ़ सके।










