CG DGP: छत्तीसगढ़ सरकार 19 मई से पहले पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त कर सकती है। इस समय अरुणदेव गौतम 14 महीने से प्रभारी डीजीपी हैं। यूपीएससी ने दो नामों का पेनल भेजा है, उसमें से एक पर अब टिक लगाना होगा।
छत्तीसगढ़ सरकार को पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति करनी होगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ समेत उन राज्यों को दो हफ्ते में जवाब मांगा था, जिन्होंने पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त नहीं किया है। दो हफ्ते का समय निकलनके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फायनल सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख तय कर दी है। इस डेट को फायनल इसलिए माना जा रहा क्योंकि लंबे समय से इस पर सुनवाई चल रही है। 19 मई से पहले अगर छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति नहीं होगी तो सुप्रीम कोर्ट बड़ा आदेश जारी कर सकता है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है, राज्य के मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट तलब कर लें।
हालांकि, प्रभारी डीजीपी का मामला यूपी समेत कई और राज्यों में भी है। मगर छत्तीसगढ़ के साथ यह अलग इसलिए है कि बाकी राज्यों ने यूपीएससी को न प्रस्ताव भेजा और न यूपीएससी ने डीजीपी के लिए कोई पेनल अनुमोदित कर भेजा है। इसलिए, बाकी राज्यों के पास बचाव के रास्ते हैं। छत्तीसगढ़ से यूपीएससी इसलिए खफा है कि दो सदस्यीय पेनल भेजने के बाद भी छत्तीसगढ़ ने छह महीने से ज्यादा वक्त हो जाने के बाद भी अभी तक पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति नहीं की।
जबकि, पूर्णकालिक की जगह प्रभारी डीजीपी रखने के केस में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त तेवर अख्तियार कर लिया है। उसने राज्यों को दो हफ्ते का टाईम दिया था। सुप्रीम कोर्ट के डेडलाइन का हवाला देते हुए यूपीएससी ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील को पत्र लिख पूछा था कि आप और एसीएस होम ये बताएं कि पेनल अनुमोदित कर भेजने के बाद भी आपने पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति क्यों नहीं की। यूपीएससी की नाराजगी की एक और वजह है। डीजीपी के पेनल के लिए उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी। आधा दर्जन से अधिक उसने क्वेरियां भेजी। इसी बीच आईपीएस जीपी सिंह का केस आ गया। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद यूपीएससी ने प्रस्ताव में उनका नाम भी शामिल करने कहा। कुल मिलाकर पेनल बनाने में यूपीएससी के तीन से चार महीने लगे। इसके बाद यूपीएससी ने दो सदस्यीय पेनल बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार को भेजा।
दो नामों का पेनल
छत्तीसगढ़ सरकार ने डीजीपी के लिए तीन नामों को पेनल यूपीएससी को भेजा था। इनमें पवनदेव, अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता का नाम शामिल था। बाद में फिर आईपीएस जीपी सिंह का नाम भी जुड़ा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में डीपीसी कर जीपी सिंह को एडीजी से प्रमोट कर डीजी बनाया और फिर उनका नाम भी यूपीएससी को भेजा। अलबत्ता, यूपीएससी ने पवनदेव और जीपी सिंह के नाम को मान्य नहीं किया। डीपीसी की बैठक में दो नाम फायनल हुए, अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता। गौतम 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और हिमांशु गुप्ता 1994 बैच के।
4 फरवरी 2025 से प्रभारी डीजीपी
अशोक जूनेजा के डीजीपी से 4 फरवरी 2025 को रिटायरहोने के बाद से छत्तीसगढ में पूर्कालिक डीजीपी नहीं है।जुनेजा के रिटायर होने पर राज्य सरकार ने अरुणदेव गौतमको प्रभारी डीजीपी बनाया था। उसके बाद से वे ही कंटीन्यूकर रहे हैं याने लगभग 15 महीने से छ्तीसगढु में प्रभारीडीजीपी हैं हालांकि, अरुणदेंव गौतम कों अगर सरकार नेपूर्णकालिक डीजीपी बना दिया तो एक तरह से कहें तोउनके लिए लॉटरी निकलले जैंसा रहेंगा। गौतम को अगलेसाल जून में रिटायरमेंट हैं| मगर अगर पूर्णकालिक डीजीपीबन गए तो फिर उन्हें दो साल का कार्यकाल मिल जाएगा।याने शि्टायरमेंट कीरियड खतम होने के बाद भी जून 2025के बाद इस पद पर बने रहेंगे मसलन, वे 15 मई कोपूर्णकालिक डीजीपी बनते हैं तो 14 मई 2028 तक वे इसपद पर रहेंगे| इसी तरह आईपीएस हिमांशु गुप्ता डीजीपीबभग तो उनका भी कार्यकाल 14 मई 2028 तक रहेगा।यद्यपि हिमांशू के रिट्टायरमेंट में अभी काफी टाईम है।










