भिलाई निगम में सत्ता संग्राम तेज: आयुक्त के कथित अवैधानिक फैसलों के खिलाफ भाजपा पार्षदों का जिलाधीश कार्यालय पर जोरदार विरोध
भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई में आयुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। सामान्य सभा द्वारा पारित प्रस्ताव की अनदेखी से नाराज भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने निगम आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिलाधीश दुर्ग को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि सामान्य सभा के स्पष्ट निर्णय के बावजूद आयुक्त लगातार नीतिगत और वित्तीय फैसले ले रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
भाजपा संगठन द्वारा गठित 6 सदस्यीय समिति के संयोजक एवं वरिष्ठ पार्षद श्याम सुंदर राव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधीश से मुलाकात कर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि 25 मार्च 2026 को निगम की सामान्य सभा में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 54(2) के तहत आवश्यक बहुमत से आयुक्त को पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद आयुक्त द्वारा ठेकेदारों को भुगतान सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णय लिए जा रहे हैं।
भाजपा पार्षदों ने इसे सामान्य सभा के अधिकारों की अवहेलना बताते हुए कहा कि यह न केवल जनादेश का अपमान है, बल्कि निगम प्रशासन में मनमानी और अवैधानिकता को बढ़ावा देने वाला कदम भी है। उन्होंने जिलाधीश से मांग की कि 25 मार्च 2026 के बाद आयुक्त द्वारा लिए गए सभी निर्णय तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं, आयुक्त को प्रशासनिक कार्यों से रोका जाए तथा शासन से स्पष्ट निर्देश मिलने तक किसी सक्षम अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई तो भाजपा पार्षद व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ेंगे। इस घटनाक्रम ने भिलाई निगम की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक उग्र रूप ले सकता है। भाजपा पार्षदों ने जिलाधीश से निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा जताते हुए कहा कि निगम प्रशासन को संविधान और कानून के दायरे में संचालित किया जाना अनिवार्य है।








