मैत्री विद्या निकेतन
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भिलाई में भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ की प्रभावी शुरुआत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर मंथन—शिक्षा के माध्यम से हर घर तक पहुंचेगी पार्टी की विचारधारा

भिलाई।
भारतीय जनता पार्टी, जिला भिलाई के शिक्षा प्रकोष्ठ द्वारा आज एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक परिचयात्मक बैठक एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा जगत एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिसने आयोजन को अत्यंत सार्थक एवं प्रेरणादायी बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षा प्रकोष्ठ के संयोजक माननीय श्रीकांतीलाल जैन थे, जबकि अध्यक्षता जिले के महामंत्री श्री मनीष अग्रवाल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं रायपुर संभाग प्रभारी श्री बृजमोहन उपाध्याय तथा बस्तर संभाग प्रभारी श्री जे.पी. घनघोरकर की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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कार्यक्रम का सफल संचालन भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ भिलाई जिला के संयोजक श्री विनोद उपाध्याय द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं कार्यालय प्रभारी श्री योगेन्द्र सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही सह-संयोजक श्री अंबिका प्रसाद द्विवेदी, श्री सूर्यकांत पाण्डेय, शिवाजी सिंह, श्रीनिवास राव, सुरेश सोनी, संजय यादव, गोविंद वर्मा, हरिश्चंद्र एवं राजेंद्र गाणा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। मातृशक्ति में डॉ. अनुराणा, श्रीमती नीता चौरसिया, श्रीमती सोनाली माधवन एवं श्रीमती सरिता चौबे भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ सभी उपस्थित सदस्यों के परिचय से हुआ, तत्पश्चात मुख्य अतिथि, अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया गया। प्रदेश संयोजक के प्रथम भिलाई आगमन पर जिला संयोजक विनोद उपाध्याय, सह-संयोजक अंबिका द्विवेदी एवं सूर्यकांत पाण्डेय द्वारा शाल एवं श्रीफल भेंटकर विशेष सम्मान किया गया।

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अपने ओजस्वी एवं सारगर्भित उद्बोधन में मुख्य अतिथि श्रीकांतीलाल जैन ने कहा कि “शिक्षा एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जिसकी पहुँच समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक घर तक है। इसके माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की नीतियों एवं सरकार के कार्यों को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है।” उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश के भविष्य के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए इसके पाँच मूल स्तंभ—पहुँच, समानता, गुणवत्ता, सामर्थ्य एवं जवाबदेही—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति बच्चों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त जीवन जीने की प्रेरणा भी देगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री मनीष अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा प्रकोष्ठ जिले में पार्टी के हर कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाएगा और शिक्षा के माध्यम से पार्टी की विचारधारा को व्यापक स्तर पर स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि “भारतीय जनता पार्टी में पद नहीं, बल्कि दायित्व मिलता है, और हर कार्यकर्ता उस दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा से करता है।”

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खाटू श्याम
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विशिष्ट अतिथि श्री बृजमोहन उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से प्रदेश में संस्कारयुक्त एवं समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि स्कूलों में प्रार्थना एवं सांस्कृतिक मूल्यों के माध्यम से बच्चों में नैतिकता एवं भारतीय संस्कृति का विकास किया जाएगा।
वहीं, बस्तर संभाग प्रभारी श्री जे.पी. घनघोरकर ने भिलाई को “शिक्षाधानी” बताते हुए शिक्षा प्रकोष्ठ से बड़ी अपेक्षाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि उपस्थित कार्यकर्ताओं का उत्साह यह दर्शाता है कि आने वाले समय में भिलाई का शिक्षा प्रकोष्ठ प्रदेश में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला संयोजक विनोद उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा प्रकोष्ठ की टीम बूथ एवं मंडल स्तर तक छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित कर पार्टी की नीतियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करेगी और संगठन को मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

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कार्यक्रम के अंत में आगामी गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई तथा आभार प्रदर्शन सह-संयोजक सूर्यकांत पाण्डेय एवं अंबिका प्रसाद द्विवेदी द्वारा किया गया।

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इस अवसर पर शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रमुख व्यक्तियों—अरुण नायर, डाकेश्वर परगनिया, गुरुनाम सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, महेश वर्मा, राकेश ओझा, सी.एम. महापात्रा, विवेक यादव, रजनी सिंह, वैभव लाकुण्ड, अफजल अहमद, सीरिकी अग्रवाल, गोविन्द वर्मा, प्रकाश नायक, अनिल विश्वकर्मा, सत्येंद्र गुप्ता, राज गुप्ता, बी.पी. सिंह, हरिलाल सोनी, विष्णु राजपूत, छत्रपाल साहू, राघवेन्द्र शाह, धीरेंद्र प्रसाद, रामजी प्रसाद सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

यह आयोजन न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रति जागरूकता एवं संवाद का एक सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।

अतुल पर्वत