मैत्री विद्या निकेतन
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भिलाई। साहित्य और नारी विमर्श के क्षेत्र में भिलाई की आशारानी ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें “शिवानी की कहानियों में नारी चेतना का स्वरूप : एक अध्ययन” विषय पर किए गए शोध कार्य के लिए डॉक्टरेट प्रदान की गई।

आशारानी ने अपना यह शोध कार्य शोध केंद्र हिन्दी विभाग, शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग से पूर्ण किया। उनके शोध का निर्देशन डॉ. वर्षा वर्मा ने किया, जबकि सह-निर्देशन डॉ. बलजीत कौर के मार्गदर्शन में यह महत्वपूर्ण शोध संपन्न हुआ। इस शोध के माध्यम से शिवानी की कहानियों में महिलाओं की चेतना, संघर्ष, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भूमिका का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।

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बाह्य परीक्षक के रूप में सतना से प्रो. दिनेश कुशवाहा उपस्थित रहे, जिन्होंने शोध की गुणवत्ता की सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय में नारी चेतना के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में साहित्य के माध्यम से स्त्री सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव को समझना बेहद आवश्यक है।

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इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शोध प्रभारी डॉ. सुनीता मिश्रा, डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. ओमनेष सुराना, डॉ. अंजन कुमार, डॉ. अम्बरीष निपाठी सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं शिक्षाविद मौजूद रहे। सभी ने आशारानी की इस सफलता को शिक्षा, साहित्य और महिला अध्ययन के क्षेत्र में प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।

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खाटू श्याम
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आशारानी की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का परिणाम है, बल्कि भिलाई-दुर्ग क्षेत्र के शैक्षणिक और साहित्यिक वातावरण के लिए भी गर्व का विषय बन गई है। उनके शोध से साहित्य जगत में नारी चेतना और स्त्री विमर्श को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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