"भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत! मॉर्फ्ड सीडी केस में CBI कोर्ट की कार्रवाई पर रोक, 9 साल पुराने राजनीतिक विवाद ने फिर पकड़ा तूल"
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत के सबसे चर्चित और विवादित मामलों में शामिल मॉर्फ्ड सीडी प्रकरण में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बड़ी कानूनी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI की विशेष अदालत में उनके खिलाफ चल रही आगे की न्यायिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से फिलहाल भूपेश बघेल को राहत मिली है। हालांकि, मामले में कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है, जिसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अदालत ने किन कानूनी और तथ्यात्मक आधारों पर यह राहत प्रदान की है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2017 में सामने आई उस कथित अश्लील और मॉर्फ्ड सीडी से जुड़ा है, जिसने छत्तीसगढ़ की राजनीति में जबरदस्त भूचाल ला दिया था। उस समय तत्कालीन मंत्री और भाजपा विधायक राजेश मूणत की कथित आपत्तिजनक सीडी के सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया था। आरोप लगाया गया था कि राजनीतिक साजिश के तहत मॉर्फ्ड वीडियो तैयार कर उसका प्रसारण किया गया, ताकि उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक छवि को धूमिल किया जा सके।
मामले की गंभीरता और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच CBI को सौंपी गई। जांच के दौरान CBI ने कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर भूपेश बघेल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल तथा अश्लील सामग्री के प्रकाशन एवं प्रसारण से संबंधित धाराओं के तहत आरोपपत्र प्रस्तुत किया।
भूपेश बघेल ने क्यों खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा?
दरअसल, मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह कहते हुए भूपेश बघेल को मामले से डिस्चार्ज कर दिया था कि उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद CBI ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी।
24 जनवरी 2026 को CBI के विशेष न्यायाधीश ने निचली अदालत के डिस्चार्ज आदेश को निरस्त करते हुए भूपेश बघेल के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश पारित कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट में क्या रखे गए तर्क?
भूपेश बघेल की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि पुनरीक्षण अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर आदेश पारित किया है। याचिका में कहा गया कि अदालत ने केवल डिस्चार्ज आदेश को ही नहीं पलटा, बल्कि आरोपों की प्रकृति को प्रभावित करने का भी प्रयास किया, जबकि ऐसा अधिकार केवल ट्रायल कोर्ट को विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्राप्त है।
इसके अलावा यह भी तर्क दिया गया कि उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य आरोप तय करने के लिए आवश्यक "गंभीर संदेह" की कसौटी को पूरा नहीं करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया कानून सम्मत नहीं मानी जा सकती।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। फिलहाल, आरोप तय करने की पूरी प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित रहेगी।
कोर्ट का विस्तृत आदेश आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मामले की अगली सुनवाई कब होगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।
राजनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
मॉर्फ्ड सीडी मामला पिछले नौ वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक बड़ा विवाद रहा है। इस प्रकरण ने सत्ता और विपक्ष के बीच लंबे समय तक तीखी राजनीतिक बयानबाजी को जन्म दिया है। भूपेश बघेल के विपक्ष में रहते हुए शुरू हुआ यह मामला उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद भी लगातार चर्चा में बना रहा और अब सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर सुर्खियों में है।
हाईकोर्ट के ताजा आदेश ने इस बहुचर्चित मामले को नई कानूनी दिशा दे दी है। फिलहाल, भूपेश बघेल को मिली इस अंतरिम राहत को राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब प्रदेश की राजनीतिक और कानूनी हलकों की निगाहें हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश और आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
कुल मिलाकर, नौ साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने फिलहाल CBI कोर्ट की कार्रवाई पर विराम लगा दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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