छत्तीसगढ़

स्मार्ट मीटर से जनता बेहाल! बढ़े बिजली बिल पर छत्तीसगढ़ में सियासत गरम, यूपी मॉडल लागू करने की उठी मांग

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट मीटर के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। बढ़े हुए बिजली बिल की शिकायतों से परेशान उपभोक्ताओं ने राज्य सरकार से उत्तर प्रदेश की तर्ज पर स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा कर इसे वापस लेने की मांग की है। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है और प्रदेश की राजनीति में यह बड़ा जनहित का विषय बनकर उभरा है।

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प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। कई उपभोक्ताओं का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल एक से तीन गुना तक बढ़ गए हैं। लोगों का कहना है कि पहले जहां उनका बिजली बिल सामान्य रूप से आता था, वहीं स्मार्ट मीटर लगने के बाद हर महीने भारी-भरकम बिल का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे मध्यम वर्ग और आम परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

मुकेश
Sarada

जनता बोली- सरकार यूपी की तरह ले फैसला

खाटू श्याम
Rungta

बढ़े हुए बिजली बिल से परेशान लोगों ने सरकार से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरह स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा कर इसे वापस लिया जाए। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि स्मार्ट मीटर से इतनी शिकायतें सामने आ रही हैं तो पुराने मीटर दोबारा लगाए जाएं। लोगों ने यह भी मांग की है कि यदि स्मार्ट मीटर के कारण उनसे अधिक राशि वसूली गई है तो उसकी भरपाई सरकार किश्तों में उपभोक्ताओं के खातों में वापस करे।

कई लोगों ने कहा कि स्मार्ट मीटर उनके लिए राहत नहीं बल्कि परेशानी का कारण बन गया है। कुछ उपभोक्ताओं ने यहां तक कहा कि वे स्मार्ट मीटर को कबाड़ में फेंकने को मजबूर हैं। लोगों का आरोप है कि बिजली बिल में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं।

अलताब
शमशेर

विपक्ष ने सरकार को घेरा

स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लगातार सरकार पर हमला बोल रही हैं। कांग्रेस ने प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी भी स्मार्ट मीटर के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा करने में जुटी हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्मार्ट मीटर को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर ने लोगों का जीना हराम कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है और सरकार जनता को भ्रमित कर रही है। उन्होंने प्रदेश की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी योजना का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं होगा तो उसका लाभ जनता तक नहीं पहुंच सकता।

सत्ता पक्ष भी बैकफुट पर

स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं को भी जनता के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं के घर भी बिजली बिल में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, लेकिन सरकार में होने के कारण वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं। बीजेपी नेताओं की ओर से स्मार्ट मीटर के फायदे समझाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन आम लोगों के बीच सरकार की बात उतनी प्रभावी नहीं हो पा रही है।

प्रदेशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन

राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल और बिजली मीटर रीडर संगठन स्मार्ट मीटर के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। बिजली मीटर रीडरों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लागू होने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। कई स्थानों पर मानदेय भुगतान लंबित होने और रोजगार प्रभावित होने को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया है।

बिजली विभाग का दावा- स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ती खपत

वहीं, बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही आशंकाओं को खारिज किया है। विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर बिजली की खपत नहीं बढ़ाता, बल्कि वास्तविक खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग द्वारा किए गए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि मई, जून और जुलाई 2026 के दौरान स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली खपत में कमी दर्ज की गई है।

रायपुर क्षेत्र के लाखों उपभोक्ताओं के आंकड़ों का हवाला देते हुए विभाग ने बताया कि जुलाई महीने में बिजली की कुल खपत जून की तुलना में कम रही है। विभाग का कहना है कि बढ़े हुए बिजली बिल का कारण केवल स्मार्ट मीटर नहीं हो सकता और वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल जारी किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में क्या हुआ था?

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। तकनीकी खामियों और भारी बिजली बिल की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था को समाप्त कर सभी उपभोक्ताओं को पोस्टपेड व्यवस्था में लाने का निर्णय लिया था। सरकार ने अतिरिक्त वसूली गई राशि को उपभोक्ताओं को वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। इसके बाद लोगों को बड़ी राहत मिली थी।

आखिर क्या है स्मार्ट मीटर?

स्मार्ट मीटर बिजली खपत मापने की आधुनिक डिजिटल तकनीक है, जो रियल टाइम में उपभोक्ता की बिजली खपत का डेटा बिजली विभाग के सर्वर तक पहुंचाती है। इससे मीटर रीडिंग लेने के लिए किसी कर्मचारी के घर जाने की आवश्यकता नहीं होती। विभाग का दावा है कि इससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक होती है।

हालांकि, छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर उठ रहे सवालों ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यदि जनता की शिकायतें लगातार बढ़ती हैं और विरोध प्रदर्शन तेज होते हैं, तो आने वाले दिनों में राज्य सरकार को इस व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करनी पड़ सकती है। फिलहाल, जनता की एक ही मांग है—बढ़े हुए बिजली बिल से राहत मिले और स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार स्पष्ट एवं जनहित में फैसला ले।