रायपुर। साइबर ठग अब आम लोगों के साथ-साथ प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान का भी दुरुपयोग करने लगे हैं। ताजा मामला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध सिंह से जुड़ा है, जिनके नाम से फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर परिचितों से पैसों की मांग की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए होने वाली साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, शातिर साइबर ठग ने सोमवार को फेसबुक पर आईएएस सुबोध सिंह के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी अकाउंट तैयार कर लिया। हैरानी की बात यह है कि फेक आईडी बनाने के महज दो घंटे के भीतर उस अकाउंट से 58 लोगों को जोड़ लिया गया। इसके बाद ठग ने उनके परिचितों और फेसबुक मित्रों को मैसेज भेजकर पैसों की मांग शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि ठग ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए खुद को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में प्रस्तुत किया और सोशल मीडिया के माध्यम से आर्थिक मदद मांगने की कोशिश की। चूंकि सुबोध सिंह प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, इसलिए उनके नाम का इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से झांसे में लेने की साजिश रची गई।
मामले की जानकारी मिलते ही आईएएस सुबोध सिंह ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी फेसबुक आईडी किस स्थान से बनाई गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। साथ ही संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर किसी भी परिचित व्यक्ति के नाम से पैसे मांगने वाले संदेशों पर तुरंत भरोसा करना भारी पड़ सकता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी सोशल मीडिया अकाउंट से पैसों की मांग की जाती है, तो पहले संबंधित व्यक्ति से फोन कॉल या अन्य विश्वसनीय माध्यम से पुष्टि अवश्य कर लें। किसी भी संदिग्ध फेसबुक प्रोफाइल को स्वीकार करने या उसके माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने से बचें। यदि ऐसी कोई गतिविधि सामने आती है तो इसकी सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में दें।
साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच यह घटना आम लोगों के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर पहचान वास्तविक नहीं होती। सतर्कता ही साइबर अपराधियों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।








