आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। ये सत्र हंगामेदार रहने की उम्मीद है, जिसमें विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी, नीट पेपर लीक और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरेगा।
विपक्षी दलों के रुख को देखते हुए सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष अपने तेवर दिखाएगा, तो सरकार ने भी विधायी कार्य निपटाने की तैयारी कर रखी है।
सरकार की ओर से रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने जहां श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी, एथनाल व नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की, वहीं परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी सरकार से सवाल किए।
हालांकि, सरकार ने इन विधेयकों पर कोई बात नहीं की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मानसून सत्र शुरू होने से पहले संसद भवन के हंस द्वार पर सुबह 10.15 बजे मीडिया को संबोधित कर सकते हैं। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 19 बैठकें होंगी।
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक की शुरुआत में विपक्षी दलों ने तृणमूल के बागी गुट को बुलाए जाने को लेकर हंगामा किया और कुछ देर के लिए बैठक का बहिष्कार भी किया। बहिष्कार करने वाली पार्टियों में कांग्रेस, सपा, द्रमुक, झामुमो, आम आदमी पार्टी, नेशनल कान्फ्रेंस व शिवसेना (यूबीटी) आदि शामिल थी। हालांकि, सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद बैठक में विपक्षी दल फिर से शामिल हुए।
विपक्षी दलों का कहना था कि जब इस गुट को सदन में मान्यता नहीं मिली है, तो किस हैसियत से बुलाया गया है। सरकार ने साफ किया कि लोकसभा के 20 सदस्यों ने एक अलग गुट बनाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के सामने अपनी मान्यता के लिए आवेदन भी किया है। भले ही इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कोई फैसला नहीं लिया है, पर उनकी संख्या को देखते हुए उन्हें नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।
चढ़ावा चोरी मामले की जांच की उठी मांग
करीब तीन घंटे चली सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों की बात ध्यान से सुनी। बैठक में 40 दलों के नेता शामिल हुए। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि बैठक अच्छी रही। सबने अपनी बात रखी। सदन बिना रुकावट चले, यह हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चढ़ावा चोरी मामले की तत्काल स्वतंत्र जांच कराने व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कहा है कि ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इसलिए चढ़ावा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
आठ विधेयक पेश करेगी सरकार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह मानसून सत्र में आठ विधेयक लेकर आ रही है। इसमें विदेशी योगदान (नियमन) संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान जैसे विधेयक शामिल हैं। इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाए जाने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा हुआ, तो सरकार इन विधेयकों को पारित कराने की भी कोशिश करेगी।
इन मुद्दों पर भी है विपक्ष की नजर
प्रेट्र के अनुसार, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने मानसून सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और मणिपुर के हालात पर भी चर्चा की मांग की है। सपा के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हम चढ़ावा चोरी का मामला संसद में उठाएंगे। हम परिसीमन और एक देश एक चुनाव का विरोध करते रहेंगे।
द्रमुक ने सरकार से मांग की कि वह संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पर स्पष्ट फार्मूला पेश करे। पार्टी सांसद टीआर बालू ने कहा कि यह आरक्षण लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर दिया जाना चाहिए।
‘टेबल आफिस की लिस्ट में तृणमूल की सदस्य संख्या 28 दिखाई गई है। 20 बागी सांसदों की एनसीपीआई में विलय को अब तक मंजूरी नहीं दी गई है, तो किस आधार पर संसदीय कार्यमंत्री ने बागी सांसदों को इस सर्वदलीय बैठक में बुलाया।’ - महुआ मोइत्रा, तृणमूल सांसद
हम संसदीय कार्यमंत्री से पत्र मिलने के बाद आए हैं। हम धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिक सद्भाव और देश की एकता में विश्वास रखते हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और देश की अर्थव्यवस्था पर उनके असर पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’-सुदीप बंद्योपाध्याय, तृणमूल बागी गुट के नेता
संसद सत्र से पहले एनसीपीआइ ने की भावी रणनीति पर चर्चा
मानसून सत्र से पहले रविवार को संसद परिसर के संविधान सदन में नेशनल सिटिजंस पार्टी आफ इंडिया (एनसीपीआई) के संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई। समझा जाता है कि इस बैठक में पार्टी की भावी रणनीति पर चर्चा की गई। तृणमूल के बागी सांसदों द्वारा एनसीपीआइ का दाम थामने के बाद इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के 20 विद्रोही लोकसभा सदस्यों ने घोषणा की थी कि वे अपने गुट का एनसीपीआइ में विलय कर रहे हैं। शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इन विद्रोही सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दी थी।
हालांकि, विद्रोही सांसदों के एनसीपीआई में विलय को स्पीकर ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। रविवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल के विद्रोही सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने एनसीपीआइ के नेता के तौर पर हिस्सा लिया।








