वोटर लिस्ट से नाम कटा तो क्या बंद होगा राशन? सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लाभ से वंचित नहीं किए जा सकते लोग
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद राशन कार्ड रद्द किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वोटर लिस्ट से नाम हट जाने के आधार पर किसी व्यक्ति को राशन समेत अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता मोहिबुल्ला मंडल को राहत के लिए संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति पात्र है, तो उसे मिलने वाले लाभों को केवल मतदाता सूची में नाम न होने के आधार पर नहीं रोका जाना चाहिए।
मामला पश्चिम बंगाल में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और उसके बाद राशन कार्ड रद्द होने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया कि उन्हें वर्ष 2016 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत ‘प्रायोरिटी हाउसहोल्ड’ श्रेणी का डिजिटल राशन कार्ड जारी किया गया था। उनका आरोप है कि गांव की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान से मिलने वाला रियायती अनाज बंद कर दिया गया, जिससे उनके भोजन और जीवन के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सीधे सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ संबंधित ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर चुके हैं। अदालत ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वह दो माह के भीतर इस मामले का निपटारा करे।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया हो, फिर भी वह कुछ सरकारी लाभ पाने का हकदार हो सकता है। अदालत ने भरोसा जताया कि संबंधित हाईकोर्ट इस मामले में उचित राहत प्रदान करेगा।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने दलील दी कि यह मुद्दा भविष्य में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर शीर्ष अदालत इस विषय पर विस्तृत स्थिति स्पष्ट कर सकती है, लेकिन फिलहाल हाईकोर्ट इस मामले पर प्रभावी ढंग से निर्णय लेने में सक्षम है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को उन लोगों के लिए राहत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिनके नाम विभिन्न कारणों से मतदाता सूची से हटाए गए हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम राहत के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।
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