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दिल्ली अग्निकांड से सबक: छत्तीसगढ़ में होटल, हॉस्टल और अस्पतालों की फायर सेफ्टी जांच की मांग तेज,कठोर कानून और सख्त कार्रवाई के बिना नहीं रुकेगी लापरवाही;– शारदा गुप्ता

दिल्ली अग्निकांड से सबक: छत्तीसगढ़ में होटल, हॉस्टल और अस्पतालों की फायर सेफ्टी जांच की मांग तेज दिल्ली में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी को लेकर छत्तीसगढ़ में भी फायर सेफ्टी व्यवस्था कड़ाई से पालन की जानी चाहिए अगर कहीं आग जानी होती है दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

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अवैध अतिक्रमण के करण हर अंधिकास जगह फायरविकेट की गाड़ियां घुस नहीं पाती  है कई बर शिकायत के बाद भी अतिक्रमण का  निराकरण नहीं किया जाता इसका दोषी कौन होगा।

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भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ की प्रदेश संवाद प्रमुख शारदा गुप्ता ने इस विषय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली की घटना से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ के सभी होटल, हॉस्टल, अस्पताल एवं नर्सिंग होम में व्यापक फायर सेफ्टी जांच तत्काल कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

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उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राज्य के सभी संस्थानों में फायर NOC की वैधता की गहन जांच की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक भवन में आपातकालीन निकास (Emergency Exit), अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म एवं स्प्रिंकलर सिस्टम सही स्थिति में उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर केवल कागजों में ही सुरक्षा व्यवस्था पूरी दिखाई जाती है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और होती है।

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शारदा गुप्ता ने आगे कहा कि अवैध निर्माण, संकरी गलियां, बंद निकास द्वार और खराब विद्युत व्यवस्था जैसी गंभीर खामियां किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती हैं। इसलिए प्रशासन को औपचारिकता से आगे बढ़कर सघन निरीक्षण अभियान चलाना चाहिए और दोषी संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक देश में इस तरह की लापरवाही पर कठोर कानून नहीं बनाए जाएंगे और उनका सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक आम जनमानस की जान इसी तरह जोखिम में पड़ती रहेगी। उन्होंने मांग की कि फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड, भारी जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई तक का प्रावधान लागू किया जाए।


शारदा गुप्ता ने यह भी कहा कि अक्सर किसी बड़ी घटना के बाद प्रशासन सक्रिय होता है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर सामान्य हो जाती है। इस प्रवृत्ति को बदलना होगा और सुरक्षा को एक स्थायी प्राथमिकता बनाना होगा।

उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे जहां भी ठहरें या इलाज कराएं, वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दें और किसी भी प्रकार की लापरवाही दिखाई देने पर संबंधित अधिकारियों को अवगत कराएं। आजकल रोड में भी एक्सीडेंट होने पर ड्राइवर जलकर मर जा रहे हैं टोल नाके पर छोटे फायर विकेट संसाधन की व्यवस्था होनी चाहिए ताकत ताकि ड्राइवर की जान को बचाया जा सके। शारदा गुप्ता ने इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखा है।

उन्होंने कहा कि किसी बड़ी दुर्घटना की प्रतीक्षा करने के बजाय समय रहते ठोस और प्रभावी कदम उठाना ही जिम्मेदार शासन और प्रशासन की पहचान है। यदि अभी कठोर निर्णय लिए जाएं, तो भविष्य में कई निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती है। मांग करने वाले में प्रमुख रूप से रविसिंग विनोद उपाध्याय कन्हैया सोनी निशुपांडे डॉ रमेश श्रीवास्तव बृजमोहन उपाध्याय अनिल सिंह  सुभाष शर्मा बंटी नाहर अखिलेश वर्मा जेपी घनघोरकर  संतोष जयसवाल गुरनाम सिंह  महेश वर्मा ओमप्रकाश यादव राजू   रमेश देशमुख नेहरू साहू  छोटू पासवान  हरीशचंद्र भारती  टिंकू संजय दुबे,  गिरीश खापर्डे दिलीप दामले, नरेश  संतोष सोनी  योगेश यदु मूकेश अजय प्रसाद सहित प्रमुख कार्यकर्ताओं ने मांग की है।