छत्तीसगढ़

2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हाईकोर्ट की जांच एजेंसियों पर की गई प्रतिकूल टिप्पणियां भी हटाईं

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि केवल जमानत आदेश से असहमति होने के आधार पर किसी आरोपी की स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती। इस फैसले को राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जमानत से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न अभी भी खुले हैं और भविष्य में इन पर विस्तार से विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि आपराधिक मामलों में ट्रायल को आगे बढ़ाने के बजाय जमानत आदेशों को चुनौती देने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

मुकेश
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सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि क्या किसी जमानत आदेश को केवल इसलिए रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि उसमें पर्याप्त कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हर कानूनी त्रुटि जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकती।

खाटू श्याम
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चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत के समक्ष कहा कि हाल के वर्षों में जमानत रद्द करने की याचिकाओं की संख्या बढ़ी है, जिस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने भी माना कि किसी जमानत आदेश में कानूनी कमी होने मात्र से आरोपी की आजादी को समाप्त करना उचित नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी और राज्य सरकार द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें चैतन्य बघेल को मिली जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। इसके साथ ही अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को भी रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने इन टिप्पणियों को पूरी तरह अनावश्यक बताया।

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गौरतलब है कि जनवरी 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों में चैतन्य बघेल को जमानत प्रदान की थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए 'पिक एंड चूज' की नीति अपनाने संबंधी टिप्पणियां की थीं। इसी आदेश को चुनौती देते हुए ईडी और राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।

याचिका में दावा किया गया था कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद मामले के कई प्रमुख गवाह सामने आने से डर रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को जमानत रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।

उल्लेखनीय है कि इस कथित शराब घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों एजेंसियां कर रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार से जुड़े इस कथित घोटाले के जरिए सरकारी खजाने को लगभग 2,161 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

क्या है सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब?

* चैतन्य बघेल की जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी।
* जमानत रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है।
* हाईकोर्ट की जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई टिप्पणियां हटा दी गई हैं।
* मामले से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर भविष्य में सुप्रीम कोर्ट विस्तृत सुनवाई कर सकता है।
* शराब घोटाले की जांच सीबीआई और ईडी द्वारा जारी रहेगी।