सांप से ज्यादा जहरीला निकला घोटाला: 431 मौतों के नाम पर 17 करोड़ की बंदरबांट, सिम्स की डॉक्टर समेत 4 गिरफ्तार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सामने आए बहुचर्चित स्नेक बाइट (सर्पदंश) मुआवजा घोटाले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राज्य में सर्पदंश से मौत पर मिलने वाले सरकारी मुआवजे का लाभ उठाने के लिए कथित तौर पर सामान्य और संदिग्ध मौतों को सांप के काटने से हुई मौत बताकर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिलासपुर सिम्स में पदस्थ रहीं डॉ. प्रियंका सोनी समेत एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
जांच में अब तक सामने आया है कि फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक दस्तावेजों के सहारे 431 मौतों को सर्पदंश का मामला दर्शाया गया, जिसके आधार पर करीब 17 करोड़ 24 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान किया गया। पुलिस के अनुसार, यह प्रदेश में अब तक सामने आया सर्पदंश मुआवजा से जुड़ा सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है।
पुलिस ने एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब राम बिंझवार के साथ तहसीलदार कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने दस्तावेजों के सत्यापन और प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच जारी है।
जांच के घेरे में कई डॉक्टर
सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले में सिम्स के चार से पांच अन्य डॉक्टर भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। उन पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने और मृत्यु के कारणों में हेरफेर करने का संदेह है। कुछ डॉक्टरों से पूछताछ भी की जा चुकी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
जशपुर में 96, बिलासपुर में दिखा दीं 431 मौतें
आंकड़े इस घोटाले की गंभीरता को और उजागर करते हैं। जशपुर जिले में पिछले तीन वर्षों में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज की गईं, जबकि बिलासपुर में कथित तौर पर 431 मौतों को सर्पदंश बताकर मुआवजे की राशि निकाल ली गई। इस असामान्य अंतर ने ही पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने इस मुद्दे को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया था। सदन में हुए हंगामे के बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
जहर से मौत को भी बना दिया स्नेक बाइट
वर्ष 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई एक मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का पहला मामला सामने आया था। इस प्रकरण में डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक वकील को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
इसके अलावा महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों में भी सर्पदंश का दावा कर सरकारी मुआवजा प्राप्त किए जाने की बात सामने आई है। इन मामलों में मृतकों के परिजन और एक वकील समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
मुआवजे के लिए ताक पर रखे गए नियम
राज्य सरकार द्वारा सर्पदंश से मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। आरोप है कि इसी प्रावधान का दुरुपयोग करते हुए सामान्य मौतों को सर्पदंश साबित करने के लिए फर्जी मेडिकल और राजस्व दस्तावेज तैयार किए गए।
अब यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा सरकारी खजाने को हुए नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है।
प्रदेश के सबसे बड़े स्नेक बाइट घोटाले के खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यदि समय रहते इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश नहीं होता, तो सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के नाम पर करोड़ों रुपये की और हेराफेरी की जा सकती थी।








