"रायपुर में सियासी बवाल! पुलिस पर बोतल-पत्थर फेंकने के आरोप में 12 कांग्रेस नेताओं पर FIR, वीडियो फुटेज खंगाल रही पुलिस"
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाजपा के कांग्रेस मुख्यालय घेराव कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। खम्हारडीह थाना पुलिस ने कांग्रेस के 12 नामजद नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने न केवल बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, बल्कि पुलिस बल पर कांच की बोतलें, पत्थर, लकड़ी के टुकड़े और जूते फेंककर शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस के मुताबिक, 22 जुलाई को भाजपा द्वारा कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम को देखते हुए राजीव भवन के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी और सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग लगाई गई थी। इसी दौरान कांग्रेस कार्यालय की ओर से नारेबाजी करते हुए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बैरिकेडिंग की ओर बढ़े और उसे पार करने का प्रयास करने लगे।
एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार, मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और शांतिपूर्वक पीछे हटने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। आरोप है कि कुछ कार्यकर्ता पुलिस जवानों के साथ धक्का-मुक्की करने लगे और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद पुलिस बल पर कांच की बोतलें, पत्थर, लकड़ी के टुकड़े और जूते फेंके गए।
इस घटना में पीएसआई देवराज सिंह के सिर में चोट आई, जबकि महिला आरक्षक सीमा बंजारे के हाथ में चोट लगने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा अन्य पुलिसकर्मियों को भी मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इस घटनाक्रम के कारण शासकीय कार्य प्रभावित हुआ और मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अतिरिक्त बल लगाना पड़ा।
खम्हारडीह थाना प्रभारी निरीक्षक भावेश कुमार गौतम की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में कांग्रेस नेताओं सुनील कुकरेजा, विनोद तिवारी, सकलेन कामदार, आकाश तिवारी, अजीत कुकरेजा, हनी बग्गा, शांतनु झा, गावेश साहू, खुबी डहरिया, सागर दुल्हानी, अजीज भिंसरा और अमित तिवारी को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा अन्य अज्ञात कार्यकर्ताओं को भी आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 121(1), 132, 191 और 221 के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफ और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके नाम भी एफआईआर में जोड़े जा सकते हैं। वहीं, इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। भाजपा जहां इसे कानून-व्यवस्था पर हमला बता रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से भी मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
रायपुर की इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।








