"शिवनाथ नदी के तेज बहाव में बहा मछुआरा, तीन जिलों की पुलिस और SDRF की टीमों ने संभाला मोर्चा"
बिलासपुर। जिले के पचपेड़ी थाना क्षेत्र में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। शिवनाथ नदी में मछली पकड़ने गया 28 वर्षीय मछुआरा तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और देर शाम तक नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका। शुक्रवार को एक बार फिर बचाव एवं तलाश अभियान शुरू किया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम जोंधरा निवासी सुखदेव केवट (28) पिता व्यसनारायण केवट पेशे से मछुआरा था और मछली पकड़कर उसका विक्रय कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे वह रोज की तरह शिवनाथ नदी में मछली पकड़ने के लिए गया था। काफी देर तक मछली नहीं मिलने पर वह नदी पार कर बलौदाबाजार जिले के लवन क्षेत्र की ओर चला गया।
बताया जा रहा है कि इस दौरान शिवनाथ नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था और पानी का बहाव काफी तेज था। नदी पार करने के दौरान सुखदेव अपना संतुलन खो बैठा और देखते ही देखते तेज बहाव में बह गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वह कुछ ही क्षणों में आंखों से ओझल हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पचपेड़ी थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घटनास्थल तीन जिलों—बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और बलौदाबाजार—की सीमा से लगा होने के कारण तीनों जिलों की पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीमों को भी सर्च ऑपरेशन में लगाया गया। नदी के विभिन्न हिस्सों में घंटों तक तलाश अभियान चलाया गया, लेकिन देर शाम तक सुखदेव केवट का कोई पता नहीं चल पाया।
पचपेड़ी थाना प्रभारी कमला पुसाम ने बताया कि नदी में पानी का तेज बहाव और बढ़ा हुआ जलस्तर सर्च ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती बना रहा। अंधेरा होने और सुरक्षा कारणों से गुरुवार शाम अभियान को रोकना पड़ा। शुक्रवार सुबह बहाव की दिशा में आगे के क्षेत्रों में फिर से सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा।
बरसात के मौसम में नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने और तेज बहाव के कारण ऐसे हादसों की आशंका बनी रहती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान नदी-नालों को पार करने या उनमें उतरने से बचें तथा पूरी सावधानी बरतें। फिलहाल सुखदेव केवट की तलाश जारी है और उसके परिजनों सहित पूरे गांव की निगाहें राहत दलों के अभियान पर टिकी हुई हैं।








