छत्तीसगढ़

"दुर्ग कलेक्टर का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: डिप्टी कलेक्टरों को मिली नई जिम्मेदारियां, कानून व्यवस्था से लेकर जन शिकायतों तक की जवाबदेही तय"

दुर्ग। जिला प्रशासन को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए जिला कार्यालय में पदस्थ डिप्टी कलेक्टरों के मध्य कार्यों का नया विभाजन एवं आवंटन आदेश जारी किया है। इसके साथ ही पूर्व में जारी समस्त कार्य विभाजन आदेशों को अधिक्रमित कर नई जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। नए आदेश के तहत कानून व्यवस्था, राजस्व, जन शिकायतों, मानव अधिकार आयोग, कौशल विकास, आपदा प्रबंधन, नशा मुक्ति अभियान और मुख्यमंत्री सहायता कोष जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां विभिन्न अधिकारियों को सौंपी गई हैं।

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जारी आदेश के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर सोनल डेविड को मानव अधिकार आयोग के प्रकरणों एवं नागरिकता प्रमाण पत्र शाखा का नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा उन्हें लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जानकारी प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। वे व्यापमं एवं परीक्षा शाखा, चिप्स परियोजना, चॉइस सेंटर, स्वान परियोजना तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली के संचालन का कार्य संभालेंगी। मुख्यमंत्री घोषणा शाखा की निगरानी भी उनके जिम्मे रहेगी।

मुकेश
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सोनल डेविड को नगरीय निकाय एवं शहरी विकास अभिकरण (डूडा) से जुड़े कार्यों का दायित्व भी सौंपा गया है। वे कौशल विकास की नोडल अधिकारी होंगी तथा चिटफंड कंपनियों से जुड़े लंबित आवेदनों के निराकरण का कार्य करेंगी। इसके अतिरिक्त जिला वेबसाइट की वेब इन्फॉर्मेशन मैनेजर के रूप में कार्य करते हुए सामान्य शाखा के सहायक अधीक्षक, सांख्यिकी लिपिक (एसडब्ल्यू), सिविल सूट एवं व्यवहारवाद शाखा, जनगणना शाखा, भू-अर्जन एवं भू-बंटन शाखा, सीएसआर एवं डीएमएफ मद से जुड़े कार्यों का संचालन करेंगी। जिला कार्यालय में आयोजित होने वाली बैठकों की व्यवस्था, कार्यवाही विवरण तैयार कराने सहित समय-समय पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी द्वारा सौंपे जाने वाले अन्य कार्य भी उनके जिम्मे रहेंगे।

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वहीं, डिप्टी कलेक्टर प्रफुल्ल कुमार गुप्ता को अनुविभागीय दण्डाधिकारी (एसडीएम) दुर्ग (शहर) नियुक्त किया गया है। उनके अधिकार क्षेत्र में थाना दुर्ग, मोहन नगर, पद्मनाभपुर एवं जीआरपी दुर्ग शामिल रहेंगे। वे कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दाण्डिक प्रकरणों का निराकरण करेंगे।

प्रफुल्ल कुमार गुप्ता को भू-अभिलेख शाखा, डायवर्शन शाखा, सहायक अधीक्षक राजस्व एवं राजस्व मोहर्रिर शाखा, राजस्व लेखा, बाढ़ राहत एवं आपदा प्रबंधन तथा सूखा राहत से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसके अलावा पर्यावरण अधोसंरचना मद, जिला नाजिर शाखा एवं जिला कार्यालय परिसर की विभिन्न शाखाओं के आकस्मिक निरीक्षण का कार्य भी वे संभालेंगे।

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जन शिकायतों के त्वरित निराकरण को ध्यान में रखते हुए उन्हें जिला जनदर्शन शाखा, पीजी पोर्टल, लोक सुराज, पीजीएन एवं शासन से प्राप्त शिकायतों के निराकरण का दायित्व भी सौंपा गया है। इसके साथ ही वे जन सूचना अधिकारी एवं शिकायत एवं सतर्कता अधिकारी के रूप में भी कार्य करेंगे। शपथ पत्र एवं प्रमाण पत्र सत्यापन, सहायक प्रोटोकॉल अधिकारी, आवास आवंटन शाखा, वरिष्ठ लिपिक शाखाएं, राजीव गांधी आश्रय योजना-2019, ऋण मुक्ति अधिनियम-1976, नजूल एवं नजूल जांच शाखा तथा लाइसेंस शाखा का प्रभार भी उनके पास रहेगा।

डिप्टी कलेक्टर प्रेमूलाल साहू को अनुविभागीय दण्डाधिकारी भिलाई नगर एवं छावनी का दायित्व सौंपा गया है। उनके अधिकार क्षेत्र में थाना भिलाई नगर, भिलाई भट्टी, नेवई, छावनी, सुपेला, खुर्सीपार एवं जामुल थाना क्षेत्र शामिल किए गए हैं। वे इन क्षेत्रों में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा बीएनएसएस के तहत दाण्डिक प्रकरणों का निराकरण करेंगे।

इसके अलावा प्रेमूलाल साहू को वित्त एवं स्थापना शाखा का अधीक्षक बनाया गया है। वे पेंशन नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे तथा न्यायालय कलेक्टर दुर्ग के प्रस्तुतकार शाखा का कार्य भी संभालेंगे। राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान के लिए उन्हें नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। साथ ही दिव्यांगजनों की शिकायतों के निराकरण की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।

प्रेमूलाल साहू के प्रभार में प्रपत्र एवं लेखन सामग्री, लाइब्रेरी शाखा, मुद्रलेखन एवं प्रेषक शाखा, मुख्य प्रतिलिपि शाखा, काउंटर शाखा, राजस्व एवं आंग्ल अभिलेखागार शाखा तथा मुख्यमंत्री सहायता कोष, संजीवनी कोष और स्वेच्छानुदान से संबंधित मामलों का संचालन रहेगा। इसके अतिरिक्त जनसंपर्क शाखा से जुड़े कार्यों का दायित्व भी उनके पास रहेगा।

कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा जारी इस नए कार्य विभाजन आदेश को जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण से जनहित से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण, कानून व्यवस्था के बेहतर संचालन तथा शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में गति आने की उम्मीद है।