मंत्री की ‘शव यात्रा’ निकालने पर भिलाई विधायक देवेंद्र यादव समेत 17 कांग्रेसियों पर FIR, बोले- जेल जाने से नहीं डरता
भिलाई। बेमेतरा जिले के ग्राम झिरिया में हाल ही में हुए कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल के पुतले की शव यात्रा निकाले जाने के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस मामले में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव सहित 17 कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला बेमेतरा जिले के चंदनु थाना में दर्ज हुआ है।
शिकायत मंत्री दयाल दास बघेल के बेटे की ओर से दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पिता जीवित हैं, इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं ने उनकी “शव यात्रा” निकालकर हिंदू धर्म की भावनाओं को आहत किया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि हिंदू परंपरा में किसी व्यक्ति की शव यात्रा निकालने और अंतिम संस्कार करने का अधिकार केवल उसके पुत्र को होता है। कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक मंच से मंत्री की मौत की घोषणा की, दो मिनट का मौन रखा और पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक प्रदर्शन का रूप दिया, जिससे परिवार की सामाजिक छवि भी धूमिल हुई है।
बताया जा रहा है कि ग्राम झिरिया में लगातार हो रही गौवंशों की मौत को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान मंत्री दयाल दास बघेल के पुतले को अर्थी पर रखकर शव यात्रा निकाली गई थी। इसी प्रदर्शन का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया।
इधर अपने खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद विधायक देवेंद्र यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वे जेल जाने से नहीं डरते और यदुवंशी होने के नाते गौवंश की रक्षा के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के समय गौमाता के नाम पर वोट मांगती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद गोवंशों की सुरक्षा करना भूल जाती है।
देवेंद्र यादव ने कहा कि ग्राम झिरिया में लगातार गौवंशों की मौत हो रही थी और कांग्रेस कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रशासन और शासन के सामने आवाज उठा रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब शासन-प्रशासन ने शिकायतों को नजरअंदाज किया, तब मजबूर होकर कांग्रेस को बड़ा आंदोलन करना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे गौवंशों की मौत के खिलाफ जनआंदोलन करार दे रही है।









