मैत्री विद्या निकेतन
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भिलाई स्टील सिटी चेंबर आफ कॉमर्स भिलाई ने भिलाई इस्पात संयंत्र के टाउन इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट जो स्वयं एक लाइसेंसिंग अथॉरिटी है अपना लाइसेंस छत्तीसगढ़ शासन को क्यों वापस सौपना चाहती है यह एक बडा प्रश्न चिन्ह है ?क्या  शिक्षा चिकित्सा की तरह ,विद्युत सेवा प्रदान करने से भी अपना हाथ भिलाई इस्पात संयंत्र खींचना चाहती है यदि हां तो सबसे पहले कारखाने के उपयोग की भूमि को छोड़कर जो भी अतिरिक्त भूमि  टाउनशिप क्षेत्र में है,भिलाई इस्पात संयंत्र को राज्य शासन को सौंप देना चाहिए ,ताकि उपरोक्त सभी भूमि का उपयोग राज्य शासन,टाउनशिप के नागरिकों को भी अपना नागरिक मानकर अपनी सेवाएं दे सके वर्तमान समय में टाउनशिप क्षेत्र में रहने वाले लोग राज्य शासन के उपभोक्ता होने के बाद भी राज्य शासन के नियमों के तहत भिलाई इस्पात संयंत्र क्षेत्र की सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं ।

चेंबर अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन भिलाई इस्पात संयंत्र के द्वारा स्मार्ट मीटर लगाए जाने के लिए वेंडर तैयार किया जाने की जानकारी विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत की है लेकिन उन्होंने अभी तक आयोग को स्पष्ट नहीं किया है वेंडर का कार्य कब से और कहां से शुरू होगा एक और जहां भिलाई इस्पात संयंत्र का विद्युत विभाग पिछले 15 वर्षों से लगातार कुर्सी पर और कैंप क्षेत्र में बिजली चोरी होने का रोना होता है लेकिन उसे चोरी को रोकने के लिए अभी तक कोई भी सार्थक प्रयास भिलाई इस्पात संयंत्र ने नहीं किया जिसके कारण टाउनशिप क्षेत्र के उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का उपभोग करना पड़ता है और दुखद विषय यह है कि बिजली चोरी को रोकने के बजाय आयोग के समक्ष बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि की बात करता है  जो समय पर बिजली बिलों का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं के हितों पर गहरा कुठाराघात करता है ।

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हालांकि अभी तक आयोग के द्वारा जन सुनवाई  की कोई तारीख का  सार्वजनिक प्रकाशन होने की कोई खबर नहीं है फिर भी हम सब स्थानीय उपभोक्ता इस विषय पर नजर बनाए रखें हैं और जब तक भिलाई इस्पात संयंत्र बिजली चोरी होने वाले क्षेत्रों में बिजली चोरी रोकने का कोई सार्थक प्रयास नहीं करता है और वर्तमान उपभोक्ताओं को विसंगति पूर्ण नीतियों से अलग नहीं करता है तब तक भिलाई इस्पात संयंत्र ना तो ,राज्य शासन को  विद्युत हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरी कर पाएगा और ना ही बिजली की दरों में किसी तरह की वृद्धि कर पाएगा ।

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स्टील सिटी चैंबर के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन नए शहर के आम उपभोक्ताओं संस्था संगठनों से भी अनुरोध किया है जैसे ही विद्युत नियामक आयोग सार्वजनिक प्रशासन करता है वैसे ही हम सब लोग अपनी शिकायतें आयोग के समक्ष दर्ज कारण और सामूहिक प्रयास करके सस्ती और सुलभ बिजली चाहे  है भिलाई इस्पात संयंत्र दे अथवा राज्य शासन दे ,उपभोक्ताओं को सस्ती और सुलभ बिजली चाहिए नियमों के बंधन से मुक्त राज्य शासन के नियमों के तहत बिजली प्रदाय जब तक विघुत सेवा  हस्तांतरित नहीं हो जाती,तब तक भिलाई इस्पात संयंत्र को देना ही होगा ।

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खाटू श्याम
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ज्ञानचंद जैन ने कहा है कि छत्तीसगढ़ शासन ने 2005 में विद्युत नियामक आयोग का गठन करके राज्य शासन के उपभोक्ताओं को एक महत्वपूर्ण उपहार दिया है जिसके कारण आम उपभोक्ता अपने हितों की रक्षा कर पा रहा है अन्यथा भिलाई इस्पात संयंत्र तो हमें अंग्रेजों की याद ताजा कराता है जो बोलता कुछ है और करता कुछ है ,ज्ञानचंद जैन ने भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों को भी बात से अवगत कराया है की जब आप रिटायर्ड हो जाओगे तब आप हमारे साथ खड़े होकर बीएसपी के विसंगति पूर्ण नीतियों के खिलाफ संघर्ष करोगे इसलिए ऐसे वातावरण से आप स्वयं बचें और हमें भी बचाएं यही आपका जनहित कारी कदम होगा ।

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शहर के आम उपभोक्ताओं के हितों के लिए भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स सदैव संघर्षरत रहेगा ।

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