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7 साल बाद कानून के शिकंजे में महादेव ऐप का मास्टरमाइंड! ओमान में सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी तेज

भिलाई/नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। करीब सात साल से फरार चल रहे महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों के अनुरोध पर जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने यह कार्रवाई की। अब भारत सरकार उसे प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) के जरिए देश वापस लाने की प्रक्रिया तेज करने में जुट गई है।

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बताया जा रहा है कि भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर पिछले कुछ समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहा था। उस पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उसे मस्कट स्थित हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। जानकारी के अनुसार, उसने अपनी कानूनी पैरवी के लिए मस्कट में वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है।

मुकेश
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5000 करोड़ के बेटिंग नेटवर्क का प्रमुख आरोपी

खाटू श्याम
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सौरभ चंद्राकर का नाम देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए संचालित किया जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क का आकार करीब 5000 करोड़ रुपये का बताया जाता है।

इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रहे हैं। दोनों एजेंसियां लंबे समय से सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों की तलाश में थीं।

अलताब
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रेड नोटिस हटाने की कोशिश भी हुई नाकाम

हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL's Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर ने दावा किया था कि उसके खिलाफ भारत में राजनीतिक कारणों से मामला दर्ज किया गया है और उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।

हालांकि CCF ने स्पष्ट किया कि यह मामला वित्तीय अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा है, न कि राजनीतिक उत्पीड़न से। इसी आधार पर रेड नोटिस को बरकरार रखा गया।

फर्जी पासपोर्ट बना नई मुश्किल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ ओमान में फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल और अवैध रूप से प्रवेश करने का मामला भी दर्ज किया गया है। ओमान के कानून के तहत यह गंभीर अपराध माना जाता है, जिसमें 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि UAE छोड़कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए ओमान पहुंचना प्रत्यर्पण प्रक्रिया को जटिल बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि अब गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

2024 में भी हुई थी हिरासत

इससे पहले वर्ष 2024 में भी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर UAE अधिकारियों ने सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया था। उस दौरान भारत ने उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध भी भेजा था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उसे बाद में रिहा कर दिया गया था। इसके बाद वह UAE छोड़कर ओमान पहुंच गया।

ED की अब तक की बड़ी कार्रवाई

महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में ED।अब तक 175 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी।कर चुकी है। एजेंसी ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार 74 लोगों को आरोपी बनाया है और रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 5 अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की हैं।

ED के मुताबिक अब तक इस मामले में 4336 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं। इनमें देश के विभिन्न राज्यों में स्थित अचल संपत्तियां, बैंक खाते, नकदी और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियां शामिल हैं।

जांच में खुल सकते हैं कई बड़े राज

ओमान में सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी को महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले की जांच में बड़ी सफलता माना जा रहा है। यदि उसका प्रत्यर्पण सफल होता है, तो जांच एजेंसियों को ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क, हवाला चैनल, मनी लॉन्ड्रिंग और इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े कई अहम राज उजागर होने की उम्मीद है। भारत लाए जाने के बाद उससे पूछताछ के आधार पर इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई नए खुलासे और बड़ी गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।