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छत्तीसगढ़

कोयला लेवी घोटाले में बड़ा एक्शन: पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव हिरासत में, आज स्पेशल कोर्ट में पेशी संभव

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित कोयला लेवी घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष एवं फरार आरोपी रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, हिरासत की वैधानिक अवधि समाप्त होने से पहले ईओडब्ल्यू वैभव अग्रवाल को विशेष न्यायालय में पेश कर सकती है।

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बताया जा रहा है कि कोयला लेवी घोटाले में दर्ज एफआईआर में रामगोपाल अग्रवाल और उनके बेटे वैभव अग्रवाल दोनों के नाम पहले से ही शामिल हैं। रामगोपाल अग्रवाल लंबे समय से फरार बताए जा रहे हैं, जबकि अब उनके बेटे से पूछताछ के जरिए जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क और कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

मुकेश
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देर रात तक चली पूछताछ

खाटू श्याम
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जांच एजेंसी के अधिकारियों ने वैभव अग्रवाल से देर रात तक पूछताछ की। इस दौरान पहले से उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और पूर्व में दर्ज बयानों का मिलान किया गया। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाई गई है। यदि आवश्यक हुआ तो परिवार से जुड़े अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

आज स्पेशल कोर्ट में पेशी की संभावना

अलताब
शमशेर

सूत्रों के मुताबिक, हिरासत की समय-सीमा पूरी होने से पहले ईओडब्ल्यू वैभव अग्रवाल को विशेष अदालत में पेश कर आगे की रिमांड की मांग कर सकती है। जांच एजेंसी पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बयान

मामले को लेकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ईओडब्ल्यू सहित सभी जांच एजेंसियां अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से जांच कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मामला पुराना है और जिसके पास भी इससे संबंधित जानकारी है, उसे जांच एजेंसियों के साथ साझा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैभव अग्रवाल से पूछताछ में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

क्या है कथित कोयला लेवी घोटाला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच राज्य में कोयले के परिवहन पर प्रति टन 25 रुपये की कथित अवैध लेवी वसूली गई। आरोप है कि ऑनलाइन परमिट प्रणाली को प्रभावित कर कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से यह राशि वसूली जाती थी। जांच में दावा किया गया है कि इस अवधि में करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कथित सिंडिकेट का संचालन कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और निलंबित उप सचिव सौम्या चौरसिया द्वारा किया जाता था। लेवी वसूली के लिए 'पाल', 'दुर्ग', 'वीकली', 'टावर', 'टुडे' और 'जुगनू' नाम से कई व्हाट्सएप ग्रुप संचालित किए जाने का भी दावा जांच में किया गया है।

ईडी की कार्रवाई

मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब तक इस प्रकरण में 273 करोड़ रुपये से अधिक की चल एवं अचल संपत्तियां अटैच  कर चुकी है। इसके अलावा 11 आरोपियों की गिरफ्तारी और 35 आरोपियों के खिलाफ पांच अभियोग पत्र (चार्जशीट) विशेष अदालत में दाखिल किए जा चुके हैं। वहीं ईओडब्ल्यू भी समानांतर रूप से मामले की जांच कर रही है।

कई मामलों में जांच के दायरे में रामगोपाल अग्रवाल

रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ केवल कथित कोयला लेवी घोटाला ही नहीं, बल्कि शराब घोटाला और कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामलों में भी जांच जारी है। विभिन्न जांच एजेंसियां उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। जांच के दौरान उनके देश के विभिन्न राज्यों और दुबई में होने की सूचनाएं भी सामने आई थीं, लेकिन अब तक उनका पता नहीं चल सका है।

कांग्रेस सरकार में मिला था अहम दायित्व

वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद रामगोपाल अग्रवाल को नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाया गया था। उनके फरार होने के बाद प्रदेश कांग्रेस संगठन में कोषाध्यक्ष से जुड़े वित्तीय अधिकार और बैंकिंग दस्तावेज संगठन के अन्य पदाधिकारियों के माध्यम से संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

अब जांच एजेंसियों की नजर वैभव अग्रवाल से मिली जानकारियों पर टिकी है। माना जा रहा है कि पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर इस बहुचर्चित मामले में आगे और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।